JPSC JSSC Irregularities – PART V RENESHA IAS BY RAVI SIR
JPSC अनियमितता PART V🇮🇳
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
RENESHA IAS
9661163344
BY RAVI SIR
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
14th JPSC BATCH 15TH JPSC FOUNDATION BATCHPROJECT MANAGER 9661163344🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: छात्र आंदोलन, CID जांच और OMR फर्जीवाड़े की पूरी कहानी
झारखंड में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले लिया है। रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इस विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां छात्र पिछले 14 दिनों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। इस विवाद ने न केवल राज्य की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि CID जांच में हो रहे रोजाना नए खुलासों से पूरी प्रशासनिक व्यवस्था कठघरे में है।
आइए, इस पूरे प्रकरण, छात्रों की मांगों और सरकार की कार्रवाई से संबंधित अपडेट्स को देखते हैं
1. छात्रों का आक्रोश और सरकार के साथ वार्ता
विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर छात्रों ने सरकार को ज्ञापन सौंपा। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच लगभग डेढ़ घंटे तक सौहार्दपूर्ण वार्ता हुई, जिसमें मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू सहित अन्य सरकारी प्रतिनिधि शामिल थे।
ज्ञापन में मुख्य रूप से क्या-क्या शामिल हैं?
JPSC JSSC REFORM MANCH — प्रेस रिलीज की प्रमुख मांगों का संक्षिप्त संकलन:
1. परीक्षाओं का तुरंत रद्दकरण (Cancellation)
- TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाएँ: 14th JPSC, JPSC Backlog (2023 & 2025), FRO, 11th–13th JPSC, APP और अन्य सभी परीक्षाएँ तत्काल रद्द की जाएँ।
- अभय तिवारी से जुड़ी परीक्षाएँ: JSSC CGL, JSSC PGT, ACF एवं अन्य सभी संबंधित परीक्षाएँ तुरंत रद्द हों।
2. निष्पक्ष एवं व्यापक जांच
- परीक्षा घोटालों की CBI और ED से निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच कराई जाए।
- JSSC CGL (2023 के दोनों पेपर लीक/री-एग्जाम), PGT, माध्यमिक आचार्य, Lab Assistant, Lady Supervisor, उत्पाद सिपाही एवं अन्य संदिग्ध परीक्षाओं की विस्तृत जांच हो।
- एजेंसियों, आयोग के अधिकारियों तथा संदिग्ध विश्वविद्यालयों से जारी प्रमाणपत्रों एवं धांधली पर कठोर कार्रवाई हो।
3. उत्तरदायित्व (Accountability)
- जांच की अंतिम रिपोर्ट अधिकतम 3 माह के भीतर सार्वजनिक की जाए।
- दोषी अधिकारियों, एजेंसियों, नेताओं एवं कर्मचारियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई हो तथा केवल अध्यक्ष का इस्तीफा न लेकर सभी संलिप्त सदस्यों को हटाकर जवाबदेही तय हो।
4. व्यापक सुधार (Reform)
- आउटसोर्सिंग समाप्त: आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर आयोग स्वयं परीक्षा आयोजित करे।
- पारदर्शिता व कट-ऑफ: हर चरण के मार्क्स, कट-ऑफ, नॉर्मलाइजेशन फ़ॉर्मूला, JPSC OMR और मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिका ऑनलाइन जारी की जाए।
- नियुक्तियों में गैर-राजनीतिक छवि: आयोगों में राजनीतिक पृष्ठभूमि या उनके करीबियों के स्थान पर केवल गैर-राजनीतिक एवं बेदाग छवि वाले व्यक्तियों की नियुक्ति हो।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट: पेपर लीक मामलों के लिए Fast Track Court द्वारा 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाया जाए।
- सहायता राशि: उत्पाद सिपाही भर्ती में मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता दी जाए।
- हेल्प डेस्क व प्रेस ब्रीफिंग: छात्रों के लिए संवेदनशील हेल्प डेस्क बने और परीक्षा कैलेंडर (LDC, दरोगा आदि) का कड़ाई से पालन हो।
- शारीरिक व आयु मानदंड:
- सिपाही/दरोगा दौड़ का समय: पुरुष – 7 मिनट, महिला – 11 मिनट (1.6 किमी)।
- JPSC में आयु कट-ऑफ 2018 का आधार तथा JSSC में अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष तय हो।
- कठोर कानून, नियम एवं SOP लागू किए जाएं।
5. अन्य मांगें
- भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्हिसलब्लोअर संतोष मस्ताना का निलंबन समाप्त कर उन्हें री-जॉइन कराया जाए और CID कांड संख्या 02/25 वापस लिया जाए।
- जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार का रुख
सरकार ने जहां छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा, वहीं छात्र प्रतिनिधि रवींद्र पासवान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 20 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
- प्रशासन को वार्ता टीम की जानकारी
5:00 PM
छात्रों ने जिला प्रशासन को अपनी वार्ता टीम के सदस्यों की जानकारी दी। - सरकार का वार्ता प्रस्ताव
6:00 PM
सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से बातचीत का प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया। - मंत्रियों का आगमन
7:23 PM
सरकार के चार मंत्री वार्ता के लिए स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचे। - छात्र प्रतिनिधियों का पहुंचना
7:45 PM
SDO की अगुवाई में छात्र प्रतिनिधि स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचे। - वार्ता की शुरुआत
7:50 PM
छात्रों और सरकार के बीच औपचारिक बातचीत शुरू हुई। - पहले दौर की वार्ता समाप्त
9:30 PM
लगभग डेढ़ घंटे की लंबी चर्चा के बाद पहले दौर की बैठक समाप्त हुई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का रुख
👉 छात्रों के बात, छात्रों के साथ
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार छात्रों की समस्याओं को समझना चाहती है और बातचीत के लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं। राज्य भर के विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं के सुझावों के आधार पर परीक्षा व्यवस्था में समयबद्ध और सकारात्मक सुधार किए जाएंगे। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
2. JPSC में CID जांच की आंच: रडार पर सदस्य और अधिकारी
परीक्षाओं में धांधली की जांच कर रही CID ने अपना शिकंजा कस दिया है। 2 सितंबर 2021 को नियुक्त हुए JPSC के तीन सदस्यों को पूछताछ के लिए समन जारी किया गया है. परीक्षा के सफल और भ्रष्टाचार मुक्त आयोजन में सदस्यों का प्रमुख योगदान होता है. सदस्यों के द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्माण सही तरीके से किया गया या नहीं इस संदर्भ में विस्तृत पूछताछ होने के संभावना है.
- डॉ. अनिमा भट्टाचार्य (कुछ आधिकारिक रिकॉर्ड्स में नाम 'डॉ. अजिता भट्टाचार्य' भी दर्ज है) – पूछताछ: 10 अगस्त
- डॉ. जमाल अहमद – पूछताछ: 12 अगस्त
- डॉ. अनिमा हांसदा – पूछताछ: 14 अगस्त
CID की जांच के मुख्य बिंदु:
- क्या JPSC के अंदर चल रही कथित अनियमितताओं की जानकारी इन सदस्यों को थी?
- 14वीं JPSC PT परीक्षा का परिणाम जारी करने में तत्कालीन चेयरमैन और सदस्यों की क्या भूमिका थी?
- परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL का चयन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और उसकी निगरानी कैसे की गई?
- क्या OMR शीट में कथित हेरफेर की जानकारी आयोग के स्तर पर किसी को थी?
3. OMR शीट में हेरफेर और TDPL का 'डिजिटल खेल'
परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी TDPL एजेंसी के पास थी, जो अब जांच के केंद्र में है। CID को 14वीं JPSC परीक्षा के लगभग 2,000 अभ्यर्थियों की संदिग्ध OMR शीट प्राप्त हुई हैं। प्राथमिक जांच के बाद इन्हें फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा जा रहा है ताकि भौतिक और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच की गई छेड़छाड़ का सटीक पता लगाया जा सके।
मुख्य सूत्रधार और मोडस ऑपरेंडी: TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी (उर्फ मनोज कुमार तिवारी) की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। CID को संदेह है कि वह अकेले नहीं बल्कि किसी बड़े प्रभावशाली नेटवर्क या पार्टनर के साथ मिलकर काम कर रहा था। जांच टीम यह पता लगा रही है कि:
- अभ्यर्थियों के कंप्यूटर डेटा और अंकों में बदलाव कैसे किया गया?
- परीक्षा के बाद मूल OMR और डिजिटल रिकॉर्ड में किस प्रकार हेरफेर हुई?
- क्या आरोपियों का सीधे तौर पर अभ्यर्थियों से संपर्क था?
4. गिरफ्तारियां और हाई-प्रोफाइल पूछताछ
इस महाघोटाले में अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। CID द्वारा पूर्व चेयरमैन से लेकर तकनीकी कर्मचारियों तक से सघन पूछताछ की जा रही है।
| नाम | पद/भूमिका | जांच का विषय |
|---|---|---|
| एल. खियांगते | तत्कालीन JPSC चेयरमैन | अब तक 4 बार पूछताछ। परीक्षा प्रक्रिया, निर्णयों और उनकी भूमिका की जांच। |
| श्वेता गुप्ता | JPSC परीक्षा उप-नियंत्रक | परीक्षा संचालन में प्रशासनिक भूमिका और अनियमितताओं की जानकारी। |
| अभय तिवारी | TDPL से जुड़े प्रमुख आरोपी | पूर्व चेयरमैन के स्टाफ से संपर्क, नेटवर्क और डेटा में हेरफेर की मुख्य साजिश। |
| रक्षक सिंह | TDPL एकाउंटेंट | रिमांड पर पूछताछ जारी। वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच। |
| धर्मेंद्र | पूर्व चेयरमैन के कंप्यूटर ऑपरेटर | तकनीकी पहुंच और अभय तिवारी के साथ संभावित सांठगांठ। |
| मो. उस्मान | TDPL तकनीकी विशेषज्ञ/कर्मचारी | डिजिटल रिकॉर्ड और OMR स्कैनिंग डेटा में बदलाव की तकनीकी जांच। |
| सोनू कुमार | JPSC कर्मी | आंतरिक दस्तावेजों तक पहुंच और बाहरी एजेंसी से मिलीभगत। |
11-13th के मुख्य परीक्षा के बाद बहुत सारे छात्रों के पास कॉल भी गए थे. कॉल के माध्यम से छात्रों को परीक्षा पास करने के बदले में एक बड़ी राशि की डिमांड की जा रही थी.
5. छात्रों की प्रमुख मांगें: केवल एक परीक्षा नहीं, पूरी व्यवस्था में सुधार
यह आंदोलन अब केवल किसी एक विवादित परीक्षा के परिणाम को रद्द करने तक सीमित नहीं रह गया है। छात्रों की आठ प्रमुख मांगें झारखंड में एक पारदर्शी और सुरक्षित भर्ती प्रणाली की नींव रखने की रूपरेखा हैं:
- पारदर्शिता: परीक्षा प्रणाली के हर चरण में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
- डेटा सुरक्षा: OMR और डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए फुलप्रूफ तकनीकी व्यवस्था हो।
- निष्पक्ष जांच: वर्तमान विवादों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
- कठोर कार्रवाई: सिस्टम में बैठे दोषियों और बाहरी माफियाओं पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- भविष्य की सुरक्षा: विवादों के कारण प्रभावित हुए निर्दोष अभ्यर्थियों के हितों और परिणामों की रक्षा की जाए।
- प्रशासनिक सुधार: भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक सुधार तुरंत लागू हों।
- एजेंसियों की जवाबदेही: TDPL जैसी परीक्षा संचालन एजेंसियों की कड़ी निगरानी और जवाबदेही तय हो।
- छात्रों की भागीदारी: सुधारों को लागू करते समय छात्रों और शिक्षाविदों के सुझावों को शामिल किया जाए।
JPSC और JSSC की परीक्षाओं में सामने आई यह कथित अनियमितता केवल कुछ अधिकारियों का भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ हुआ खिलवाड़ है। CID जांच का दायरा अब राज्य के बाहर तक फैलने की संभावना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार 10 अगस्त 2026 की डेडलाइन से पहले छात्रों का भरोसा जीतने के लिए क्या ठोस प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाती है।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
RENESHA IAS

Comments